चायनिज़ ससुराल: Chinese Sasuraal Hindi akhbari Kahani - Divubha Chandli

चायनिज़ ससुराल - Chinese Sasuraal - Hindi akhbari Kahaniअख़बारी कहानियाँ - Hindi Story - Divubha Chandli


चायनिज़ ससुराल: Chinese Sasuraal Hindi akhbari Kahani - Divubha Chandli
चायनिज़ ससुराल - Divubha Chandli

खाना पीना हर किसी का अपना अपना होता है.किसी किसी ससुराल में nonveg नहीं खाते, तो कहीं प्यासलसुन, लेकिन क्या हो कि किसी के ससुराल में खाने केनाम पर मिले और बने तो सिर्फ और सिर्फ chinese.माँ माँ कुछ खाने को देना ये ले बेटा दाल चावल खा ले.दाल चावल कौन खाता है जी ना जाने,माँ तू कब ना अच्छा खाना बनाना सीखेगी?मैं जा रही हूँ noodles बनाने.अरे नहीं नहीं बेटा, वो भी कोई खाने की चीज़ है.अरे दाल, चावल, खाया, कर, रोटी, हरी सब्ज़ी.मां ज्ञान मत देख, मांजली की kitchen में.नेहा का हाल बुरा था.

उसे घर का खाना ही नहीं अच्छा लगता था.माँ सब्ज़ी देती थी तो वो momos खाती माँ रोटी खिलाने कीकोशिश करती तो वो बाहर से तंदूरी खाती और फिर एक दिन.अरे नेहा तू माँ लड़के वाले आरहे हैं, हमारी नेहा को देखना.अच्छा जी, क्या करता है लड़का?Engineer है, engineer.बड़े घर के लोग हैं बैठे राज करेंगे राज शाम को रामनीहां को देखने आता है उसे नीहां पसंद आ जाती है मुझेलड़की पसंद है लेकिन मैं कुछ बात करना चाहता हूं.नहीं नहीं नहीं कोई बात नहीं करनी.जो करनी है सबके सामने करो.

अच्छा बेटा नेहा यह बताओ खाना बनाना आता है.माफ़ करिएगा, वो क्या है ना ऐसेसिर्फ chinese और तंदूरी बनाना आता है.पेज़िक दाल, चावल, रोटी, सब्ज़ी बनाना ही नहीं बस अगररिश्ता पक्का हो जाता है ना तो मैं सिखा दूंगी.नहीं नहीं नहीं कोई ज़रूरत नहीं हैसिखा नहीं मां मुझे नेहा पसंद है.हां हां पसंद तो मुझे भी है.वह क्या है ना यह सब खाना मुझे भी पसंद नहीं मुझे तोसिर्फ Chinese पसंद है और वह आता है तब वह आता है. वाह.नेहा भी खुश हो जाती है.लेकिन न जाने क्यों राम नेहा सेएक बार कुछ बात करना चाहता था.

वह फ़िलहाल नेहा का number लेकर अलग चला जाता है.लड़का कितना प्यारा खाना?हां नहीं प्यारा है, लेकिन मेरे बेटे तो उससे भीज़्यादा प्यारी कैसा लट्टू हो गया था मेरी बेटी पर.पर papa आपने ध्यान दिया, वह कुछ कहना चाह रहाथा, लेकिन उसकी मां ने उसे कैसे चुप कर दिया?लगता है माँ से डरता है.कई माँ माँ ही ना करता रह जाए.अरे हाँ, बड़ा माँ माँ करे.सब मामा करने वालों को ना लोग आए ठीक कर देती हैं.तो तो बस उसकी सुनना कि वह क्या जाता है और वही करना.समझी सही कह रही है मां.मैं वैसे ही करूंगी.

अब क्या था?नेहा लग जाती है शादी की तैयारी में.जब भी राम का phone आता तो वह कभी shoppingकर रही होती तो कभी मेहंदी उसे वक्त ही नहींमिल पाता कि वह राम की बात को सुनें.फिर क्या हो जाती है शादी, नेहाकी राम की साथ, अगले रोज़.हां जी, अब बताइए क्या कहना चाहते थे आप?वह क्या है ना शादी ब्याह बार बार तो होता नहीं.तो मैंने सोचा कि जरा शादी निपटा लूं और फिर बात करूंगी.अब क्या बोलूं?शादी तो हो गई.वैसे मैं क्या कह रहा था कि तभी सास की आवाज़ आती है.नेहा, सुबह सुबह बहु kitchen में होती है.

कहां है तू?अभी आई जी, वो कह है ना माझे कोसुबह सुबह soup दे दो sweet corn का.मेरा भी ना सिर दर्द हो रहा तो soup बनाना ही है.आप पिएंगे ना?मैं तो चाय पीता हूं चाय.वह बना दो ना please.चाय तो पहले बताना था ना, पहले चाय बनाना सीखाही नहीं ना मैं पीती हूं ना बनाती हूं.हर देखो ना ससुराल भी मेरे मतलब का मिल गया.सांस भी सुबह सुबह Chinese नहीं कि बेचारा राव.वह सोचता है कि उसकी किस्मत कैसी है.घर घर कम hotel ज़्यादा लगता है.मां को तो शौक था सोचा था बीवी देसी आएगी लेकिन यह भी.Hi रेखा is smart.

राम चप्पल पहनकर निकल रहा था कि कहाँ जा रहे हैं जीसुबह सुबह अरे जाने देना वो नुक्कड़ से चाय पीने जाता हैअरे क्यों जी सुख पी लीजिए ना chinese अभी अभी बनाया है.अरे रहने दे वह नहीं पीता है sir.अच्छा तू ना नाश्ते की तैयारी कर.क्या बनाएगी अब?नेहा, आलू का पराठा बना दो.मुझे नहीं आता.मैंने manchurian बना रही हूं, सासूमां की भी favorite है. क्यों मा जी?अरे हां हां कि नहीं बिल्कुल बना लो.फिर खाने में ना fried rice बना लेना.अरे राम, उससे तु शुद्ध घर का इशारा का.अरे खाना पसंद था लेकिन घर में कौन बनाए खाना?

बीबी और माँ दोनों एक जैसी.फिर अफवाह क्या बात है यार?तो परेशान सा लग रहा है सब ठीक है ना?क्या ठीक है यार?सोचा था शादी के बाद घर का अच्छादेशी खाना न नसीब होगा लेकिन नहीं.यहां तो फिर वही chinese खाना पड़ रहा है.तेरी तो बात करता है ना शादीसे पहले तेरी तो range marriage है.रिक्कियां से बात करता.मां ने कहा नहीं नहीं दी बात औरबाद में भी बात नहीं हो पाई.मेरी सासू मां तो बोल रही थी कि खानाबनाना सिखा देगी, लेकिन नया अब क्या बोलूं?

चल जो नसीब में होता है वही होता है.पर अब क्या करूं?हां नहीं मानते ऐसे दोस्त, समझे?कोई ना कोई रास्ता ज़रूर निकलेगा.देखते हैं क्या रास्ता निकलता है?अभी तक तो कुछ नहीं दिख रहा.अरे कैसे नहीं दिख रहा?रास्ता हम दिखाते हैं.यह बोल कर दोस्त राम के कान में कुछ कहता है.सही है.इससे ही शायद बात वन जाएगी.शाम को राम घर जाता है और फिर नेहा,नेहा कल मेरे office से कुछ लोग घर खानाखाने है तो dinner अच्छा बना लेना ठीक है.हां हां कल manchurian momos fried riceऔर noodles से बना लूंगी साथ में.

अरे वह लोग Chinese नहीं खाते हैं.वह क्या है ना पंकज की बीवी हैना राधा वह खाना बहुत अच्छा बनाती है.तो वही क्या रहा था कि देखिएअब नेहा का ऐसा खाना बनाती है.कहीं वह भी सिर्फ फटाफट chinese बना कर तो नहीं रख देती.मैंने भी कह दिया नहीं नहीं नहीं नहींमेरी बीवी के हाथ का शाही पनीर, butterमसाला, रोटी, पतली पतली खा कर तो देखो.राम बोले जा रहा था, बोले जा रहा था नेहा सोचरही थी कि यह बोल तो आए हैं पर बनेगा कैसे?क्यों परेशान हो रही है बाहुबली कीहलवाई से सारा खाना आ जाएगा.तो आराम कर और सुबह उठकर पत्ता गोभी काट देना.

मैं momos बना दूंगी.नेहा भी खुश हो जाती है और वहां से चली जाती है.बड़ी आई राम की मनपसंद खाना बनाने वाली.कल को खाना बनाएगी, फिर दोनों सारा दिन घूमनेजाएंगे और घर में मेरे लिए कौन खाना बनाएगा?Favorite, मेरे Chinese.इन दोनों को अलग अलग रखकर ही मैं अपना काम चला पाऊंगी.बस माँ बहुत हो गया.अरे घर के मर्द की किसी को चिंता ही नहीं है.नेहा मैं तुमसे यही बात करना चाहता थाकि मैं chinese नहीं खाता और ना खाऊंगा.मुझे अच्छा शाकाहारी घर का खाना खाना है.दे सकती हो 

तो बोलो नहीं तो.यह तो पता रहता शादी क्यों पहले?जब मेरी बात चिल्ला चिल्ला कर बोल रहीथी कि मैं खाना बनाना इसको काट दूंगी.बोलना तो था लेकिन बोलने किसी ने नहीं दिया.अब कल मेरे office से लोग आए या तो खाना बनाना सीख लो.या फिर मैं उन लोगों को मना कर दूंगा कि आने की कोईज़रूरत नहीं है क्योंकि मेरी बीवी को खाना बनाना आता ही नहीं.नेहा को बेइज्जती feel होती है.वो सांस की और टिकती है.सांस को लगता है कि अगर बहु दूसरा खाना बनाना शुरूकर देगी तो उसे रोज़ रोज़ chinese बना कर कौन देगा?

अरे रहने ही दे बहो.वह बोलता रहता है.ठीक है मां जी.फिर मैं मना कर देती हूं कि मैं खाना नहीं बना पाऊंगी.नेहा को साज़ का साथ मिलता हैऔर वह खाना बनाना छोड़ देती है.राम भी कुछ दिन कहता है और फिर वहनेहा से बात करना ही काम कर देता है.नेहा मां के घर जाती है और सारी बात बताती है.देख नेहा तेरी सास game खेल रही है.पहले तो उसने राम को तुझसे बात नहीं करने दी.उसके बाद अब बेटे से ज़्यादा खुद के खाने की चिंता.अरे, ठीक है.घर में जितने लोग रहते हैं उतनी चीज़े बनती है.

तेरे घर में क्यों नहीं?राम के लिए भी ठीक से खाना बनना ही चाहिए.आखिर घर का कामाओ पुछ तो वही है.बेटा तू अपने पति के पसंद का खाना बनाया कर.क्योंकि के दिल का रास्ता उसके पेड़ से जाता है.अब नेहा कुमार की बात समझ में आ जाती है.वह घर आकर राम का मनपसंद खाना बनाती है.राम office से आता है तो यारकाज आया यह खाना कहीं से नहीं.मुझे माफ कर दीजिए.मैं आज से सिर्फ आपके पसंद का खाना बनाऊंगी.

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