गरीब बुढ़िया इमली वाली - Gareeb Budhiya Imli Wali - Hindi Inspirational Stories - प्रेरणादायक कहानियाँ - Hindi Kahani - Divubha Chandli
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| गरीब बुढ़िया इमली वाली - Divubha Chandli |
इस उम्र में इतनी गर्मी में आपके लिएधूप में रहना अच्छी बात नहीं है.तभी उस आदमी की पत्नी शीतल ने कहा, तो ताकिआपके घर में दूसरा कोई कमाने वाला नहीं है क्या?आपका कोई परिवार नहीं है ये सुनते ही उस बूढ़ी औरत की आंखोंसे आंसू बहने लगे और उसे अपनी पुरानी दिन याद आने लगे.वो अपने बेटा बहु और पोता पोती के साथ रहती थी.सब कुछ बहुत अच्छे से चल रहा था एक दिन.माँ मैं और तारा जागरण में जा रहे हैं.आप गुनगुना और रोहन का ध्यान रखना.ठीक है बेटा कुछ तो नहीं इससे छेड़ा होगा.
हां मेरी बच्ची, सरला ने बच्चों कोकिसी तरह बहलाकर लोरी सुनाकर सुला दिया.कुछ देर बाद किसी ने दरवाजा खटखटाया.उस आदमी ने जो सरला से कहा उसे सुनकर तो वहहैरानी रह गई नहीं ऐसा नहीं हो सकता हम आपकी भावनाओंको समझ सकते हैं मां जी लेकिन पंडाल में आग इतनीज़्यादा थी कि उन दोनों का बच पाना मुश्किल था.सरला पर तो जैसे दुखों का पहाड़ ही टूट पड़ा.Hey ऊपर वाले यह तूने क्या किया तू मजबूरिया को ही लेजाता भला मेरे जवान बेटे बहु को ले जाने की क्या ज़रूरतथी सरला ने किसी तरह खुद को संभाला ऐसे कुछ दिन बीतगए फिर सरला ने बच्चों की परवरिश के लिए इमली बेचना शुरूकर दिया इमली ले लो,
इमली खट्टी खट्टी मज़ेदार इमली.Sir ने इसी तरह इमली बेच बेचकर उन दो बच्चोंको पढ़ाया और उनकी परवरिश करने लगी अब दोनों हीबच्चे बड़े हो चुके थे पढ़ लिख कर दोनों अच्छीनौकरी करने लगे और पैसे कमाने लगे.उसके paper मंगवाए हैं, जिसमें साफ साफ लिखा है किउनके जाने के बाद उनकी ज़मीन पर हमारा हक है.इसलिए हम दोनों भाई बहनों से आधा आधा बाँट लिया है.अच्छी बात है बेटा लेकिन तुमने एक बार भी इस बढ़ियासे पूछना ज़रूरी नहीं समझा जब आपका उनकी property पर दोकौड़ी का भी हक नहीं है फिर आपका इस घर मेंक्या काम और ना ही हमें आपकी ज़रूरत है इसलिए आपइस घर से निकल चाहिए कि तुम क्या कह रहे होमेरे बच्चों यह बुढ़िया यूं हमें emotional blackmail करने की कोशिशमत कर और अब निकल जा मार कर से.हां नहीं तो धक्के मार कर हम तुम्हें निकाल देंगे.
तुम दोनों इतना कैसे बदल गए मैं नहीं जानती कि तुम ऐसाक्यों कर रहे हो लेकिन जब कभी भी तुम्हें मेरी ज़रूरत होगीतो तुम्हारी यह दादी हमेशा तुम लोगों के साथ खड़ी रहेगी जिसउम्र में सरला को अपने पति पत्नी की ज़रूरत थी उस उम्रमें उन दोनों ने उस बूढ़ी का साथ छोड़ दिया बेचारी सरलाटूटे हुए दिल के साथ एक घूसे की झोपड़ी बनाकर रहने लगीऔर अपना पेट पालने के लिए इमली बेचने लगी.ग हुआ क्योंकि कुछ नहीं बेटा कुछ यादें आंखों में उमड़गई थी लगता है आपके दिल में गहरी चोट लगी है.काफी एक बात कहना चाहूंगा.
आपके जैसे हर उस इंसान को मेरा सलाम है, जो इसउम्र में भी खुद मेहनत करके अपना पेट पालते हैं.मैं तो ऊपर वाले से यही चाहूंगा कि आप जैसे हिम्मतमुझे भी उम्र के इस पड़ाव तक आते आते देना.ताकि मुझे भी किसी के आगे हाथ ला फैलाना पड़े.ऊपर वाला आपके सकमुख को जल्दी भर दे बाजी.सकमुख बहुत गहरा है बेटा, अब तो यह town में साथ रहेगा.ऐसे ही कुछ रोज़ beat कर सरलाइमली बेचकर अपना गुज़ारा करती थी.उसके पास कई लोग इमली खरीदने आते थे.सड़क किनारे पेड़ की छांव में बैठकर वह इमली भेजती थी.
सभी उसे इमली वाली अम्मा के कर बुलाते थे.इमली वाली अम्मा मुझे बीस रुपए की इमली देना.इमली वाली अम्मा मुझे दस रुपए की इमली देना.हां हां मेरे बच्चों अभी देती हूं.ऐसे ही सरला अपना गुज़ारा चला रही थी.फिर एक रोज़ उसने देखा एक लड़का root cross कर रहा थाऔर सामने से एक truck तेज़ी के साथ हारा था तभी सरलाने उस लड़के को suit का धक्का दिया और खुद उस truckके नीचे आती उस लड़के ने जैसे ही उस बूढ़ी औरत कोदेखा तो वो ज़ोर ज़ोर से रोने लगा.वो लड़का कोई और नहीं बल्कि सरला का पौधा रोहन ही था.
दादी, दादी.तुम्हारी माँ अब अब मुझे बुला रहे हैं.अब roman को अपनी गलती का एहसास हो चुकाथा लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी.इमली वाली बूढ़ी अम्मा अब सदा सदाके लिए खामोश हो चुकी थी.अम्माँ तीस रुपए की जामुन कर दो.हां हां हां, बिटिया देती हो, यह लो.Mummy, यह भूरी अम्मा इस उम्र मेंभी कितना काम कर रही है?हां बेटा, शायद इनका इस दुनिया में कोई नहीं होगा.तभी तो इतनी उम्र में भी खुद काम कर रही है.चलो बेटा auto वाला wait कर रहे हैं.उस औरत की बातों को सुनकर जानकर नाम कीउस बूढ़ी औरत की आंखें भर आती हैं.और वह अपने आप से ही बातें करने लगती है.
हां, आज मैं इस दुनिया में अकेली हूं.पर कल तक मैं अकेली नहीं थी.मेरा भी परिवार था पर.सोनू जी papa को गए एक महीना हो गया परतुम्हारी मां अभी तक सदमे से बाहर नहीं आई.घर के सारे काम मैं करूं और वह आराम से बैठकर रूठे मैं कोई नौकरानी नहीं हूं तो मैंने किसी वृद्धआश्रम में छोड़ा मैं तंग आ गई हूं इनसे तुम जानतेभी हो सुधा तुम क्या बोल रही हो?यह घर मां के नाम है अगर मां चली गई तो उनकेसाथ यह घर भी चला जाएगा फिर रहना सड़क पर बात करतीहो लाओ मेरा tiffin दो मैं late हो रहा हूं विनोद कामपर चला जाता है तभी जान की मंदिर से आ जाती है.होता सूरज भी साथ था.
Mummy देखो, दादी मां और मुझे प्रसाद में खीर मिली आपभी खाओ ना mummy मुझे नहीं खानी और चुपचाप जल्दी सेखीर खत्म कर और पढ़ने बैठ एक Sunday का दिन होताहै और पूरा दिन तू घूमने फिरने में लगा देता है.और माझी आपको जब मैंने बोला था आज machineलगाकर कपड़े धोते ना तो आपसे कपड़े तो धुलेनहीं सुबह सुबह पूजा करने मंदिर चली गई.अब machine लगाकर कपड़े धो लो पड़ी मेहरबानी होगी चिंता मत करो बहुमैं बस machine लगाने ही जा रही हूं सुधा यही स्वभाव था वहअपनी सास जानकी पर अत्याचार करती थी घर के सारे काम जानकी करतीथी पति के दुनिया से चले जाने के बाद जानकी पर मुसीबतों कापहाड़ टूट पड़ा जानकी बहु सुधा तो इसी फिराक में थी कि किसतरह से जानकी को इस घर से धक्का देकर उनके घर की मालकिनवन जाए और उसे मौका मिल ही गया.
अरे मैं मर गई.कि गर्म पानी क्या हुआ सुधा तुम्हारा हाथ कैसे जल गया यहसब तुम्हारी मां के कारण हुआ है उन्होंने जान बूझकर बाल्टी मेंगर्म पानी भरकर रखा था ताकि मैं नहाने जाऊं तो मैं जलजाऊं अब मैं इस घर में एक पल भी नहीं रहूंगी मैंजा रही हूं यहां से आपको शर्मा होनी चाहिए आपकी वजह सेआज मेरा घर परिवार टूट रहा है आप कहीं चली क्यों नहींजाती हो मेरी इसमें कोई गलती नहीं विनोद बेटा मुझे तो बहुनहीं कहा था कि उसे गर्म पानी से नहाना है और मैंनेउसे कहा भी था कि बाल्टी में गरम पानी मैंने रख दियाहै मुझे नहीं पता कि यह बहु ऐसा क्यों कर रही हैतुम बेकार में ही मुझ पर नाराज़ हो रहे हो हां हांमैं ही झूठी हूं आप ही सच्ची रहो अपने बेटे के साथसूरज school से आ जाए तो मैं उसे लेकर चली जाऊंगी.
चिंता मत करो सुधा मैं कोई ना कोई इंतज़ाम कल तक करही लूंगा पर मां इस घर में नहीं रहेगी विनोद काम परचला जाता है और सुधा अपने कमरे में जाकर सोच आती हैकुछ देर बाद सूरज school से आता है तब उठती है mummyदादी गांव सब अरे मेरे राजा बेटा आ गया चल तू बैठमैं तेरे लिए अभी खाना लगाती हूं मांझी खाना वन गया यानहीं अरे यह कहां चली गई mummy कहां चली गई उन्होंने मुझेबोला था आज मुझे park में झूला झूलने ले जाएंगी सुबह पूरेघर में देखती है पर उसे कहीं भी जान की नज़र नहींआती वह विनोद को phone मिलाती है विनोद घर आता है विनोदसूरज से मिलने के लिए सूरज बेटा रोते नहीं हैं.
तुम्हारी दादी जी हरिद्वार गई हैं.वहां एक बहुत बड़ी पूजा होने वाली है.इसलिए उन्हें आने में थोड़ा समय लगेगा.कुछ दिनों बाद तुम्हारी दादी आ जाएंगी ठीक है सुधा और विनोदकिसी तरह सूरज को समझा देते हैं पर वह दोनों जानकी केबारे में कुछ भी पता करने के बारे में नहीं सोचते.जानकी सड़कों पर अकेली बेसहारा घूम रही थी.जानकी के पास जो थोड़े बहुत पैसे थेवह लेकर वह दूसरे शहर आ गई.और एक झुकी में रहकर अपना गुज़ारा करने लगी.अब तो बहुत से झुकी वाले जानके को जानते थे.
जानके को घर से निकला आज दस साल हो गए.पिछले दस सालों से जानकी अपने परिवार से दूर है.पर विनोद और सुधा ने उसे ढूंढने तक की कोशिश नहीं की.गर्मियों का season आया तो जान की भीमंडी से जामुन खरीदे और जामुन बेचने लगी.आज अस्सी साल की उम्र में जानकी दुनियां में परिवारके होते हुए भी अकेली हैं और आज भी खुदसे कमा कर अपनी ज़िंदगी गुज़ार रही है.जनता की घर चल रही हो, मैं घर ही जा रही हूं.शोभा भीठिया.अभी बहुत जामुन पड़े हैं.
मैं सोच रही हूं कुछ देर और बैठ जाती हूं.थोड़े और बढ़ जाएंगे तो नुकसान नहीं होगा.लाला के जामुन के पैसे लौटाने हैं. घर ले गई तो जामुन खराब हो जाएंगे औरतुम्हारी नारियल पानी की बिक्री हुई क्या थोड़ी?और कहा कि आज बाज़ार में घूम कर बेचे, तब जाकर भी के.मैं तो कहती हूं मुझे दे दिया करो बेचने के लिए.पर तुम मानती कहां हो का कि?नहीं बिटिया, तुझे भी तो अपने घर का ख्याल रखना है.तू भी तो कितनी मेहनत करती है ना?तेरे papa की तबीयत ठीक नहीं रहती.
मुसीबतों घरों में काम करती है.कम से कम तो मेहनत करके घर को चला लेती है.यह बहुत बड़ी बात है बिटिया.चिंता मत कर.मेरी बुरी हड्डियों में बहुत ताकत है.ज़िंदगी के दुखों ने मेरे शरीर को मज़बूत बना दिया है.तुमसे बहुत कुछ सीखने को मिलता हैताकि अच्छा मैं घर चलती हूँ.फिर तुम आराम से आ जाना.लड़की को जामुन भेजते रात हो गई.उसके पास अभी भी जामुन बचे हुए थे.तभी उसके पास एक गाड़ी आकर रुकती है.अरे यार जामुन खाने का बहुत मन हो रहाहै, चल ना उन अम्मा से जामुन लेते हैं.
एक काम कर तू जल्दी से जाकर ले, मैं गाड़ी side लगाता हूं.अम्मा पचास रुपए के जामुन कर दो.अभी करती हूं बेटा.अम्मा मेरे पास पांच सौ का note है.आपके पास खुले होंगे.नहीं बेटा मेरे पास खुले तो नहीं है.सूरज सूरज तेरे पास पचास रुपए है क्या?जरा पकड़ा दो है तो.सूरज, जानकी सूरज नाम सुनकर थोड़ी घबरा जाती है.अचानक वह लड़का गाड़ी से बाहर निकलता हैऔर जानकी को देखकर चौंक जाता है.दादी मां और यहां.सूरज तब छोटा था.दस साल का बच्चा सूरज आज बीस साल का हो चुका था.सूरज अपनी दादी को पहचान गया और वो दादी दादी कहकरअपनी दादी के गले लग कर फूट फूट कर रो पड़ा.
सूरज college में पढ़ रहा था.तो वो इसी शहर में रहता था.सूरज को जानकी से सारी बात पता चलती है औरवो भी अपने पोते से लिपटकर खूब रोती है.इसके बाद जानकी सब से विदा लेकर अपनी पोतीसूरज के साथ अपने शहर अपने घर पहुंचती है.जानकी को सूरज के साथ देखकर विनोद और सुधा हैरान रह जातेहैं पर सूरज गुस्से में था mummy papa आखिरी बार आप लोगोंसे मिलने पर अपना सारा सामान लेने आया हूं आज के बादमैं आप लोगों को अपनी शक्ल कभी नहीं दिखाऊंगा.मैं दादी के साथ रहूँगा.
आपने मुझसे झूठ बोला कि दादी महा हरिद्वार गई है.पर आज दस साल बाद दादी की हालत देखकर सचमुच मुझेआपको अपने माता पिता कहते हुए भी शर्म आ रही है.मैं हमेशा दादी मां के बारे में आपसे पूछता था.पर आप हमेशा टाल देते थे कहीं ऐसा ना हो जैसा आपने दादीमां के साथ किया है ना कल आपके साथ ऐसा हो जाए परनहीं आपके साथ ऐसा कुछ नहीं होगा क्योंकि मैं तो आप दोनों केसाथ अपने सारे रिश्ते तोड़कर दादी मां के साथ जा रहा हूं नहींसूरज बेटा ऐसा मत कर हम तेरे बिना जी नहीं पाएंगे पैसा तोदादी मां के बुढ़ापे का सहारा भी तो आप ही थे ना?तब आपने क्यों नहीं सोचा?मैं आप दोनों की नहीं सुनूंगा.मैं दादी मां के साथ जा रहा हूं.सूरज, जानकी के साथ वापस जाने लगता है तभी सुधा औरविनोद, रोते बिलखते जानकी के पैरों में गिर जाते हैं.
सूरज को अब मुझे किसी doctor की ज़रूरत नहीं मैं अपनेपोता और बेटा बहु से बिल्ली अब जीने की इच्छा नहींसूरज बेटा अपने माता पिता को माफ कर देना अपने मातापिता की खूब सेवा करना माता पिता का आशीर्वाद भगवान काआशीर्वाद होता है हमेशा खुश रहना बच्चों ऐसा लग रहा थामानो वह अपने बेटा बहु और पोते से मिलने के लिएही अब तक इस दुनिया में ज़िंदा थे.विनोद और सुधा की आंखों में शर्मिंदगी के आंसू थे.सूरज अपनी दादी से लिपटकर बहुत रोता है.आज उसकी दादी गरीबी में ज़िंदगी के दुखों कोझेलते हुए इस दुनिया से जा चुकी थी.
