सख्त जेठानी: Sakhat Jethani Hindi Akhbari Kahani - Divubha Chandli

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सख्त जेठानी: Sakhat Jethani Hindi Akhbari Kahani - Divubha Chandli
सख्त जेठानी - Divubha Chandli

अनन्या की अभी नई नई शादी हुई थी.शादी के बाद अनन्या जब अपने ससुराल में आती है तोवह देखती है कि उसकी जिठानी थोड़ी मिजाज़ की है.वह ना किसी से ज़्यादा बात करतीहै ना ही किसी से हंसी मज़ाक.अनन्या की जेठानी आरती सिर्फ अपने काम से मतलब रखती ऐसेही एक दिन आरती आलू के पराठे बना रही थी.अरे वाह दीदी अब तो बहुत अच्छे आलू की पराठे बनाती है.मुझे तो इतने अच्छे पराठे बनाने आती ही नहीं.अगर बनाने नहीं आते तो सीख जाओ.

मैं यहीं खड़ी हूँ, जैसे मैं करतीजा रही हूँ, वैसे करती जाओ.अच्छा ठीक है, आप मुझे बताइएगा.अब आरती अनन्या को आलू भरना सिखा दी है,पर अनन्या एक ही गलती बार बार करती है.जिस वजह आलू के पराठे उससे वन नहीं पाते.यह देखकर आरती को अनन्या पर गुस्सा आ जाता है.तुम्हारे घर वालों ने तुम्हेंखाना बनाना नहीं सिखाया क्या?जो तुम एक ही गलती बार बार कर रही हो.अगर इसी तरह से एक ही गलती बार बार करोगीतो कभी भी आलू का पराठा बनाना नहीं सीख पाओगे.

आखिर सारी ज़िंदगी मैं तो तुम्हें बनाकरनहीं खिला पाऊंगी आलू की पराठे?मैं कोशिश कर रही हूँ, जल्दी सीख जाऊंगी.इतना बोलकर अनन्या पूरे ध्यान सेआलू के पराठे बनाने लगती है.अनन्या को पराठे बनाते देखकर आरती वहां से चली जाती है.अपनी जिठाने का इतना सख़्त मिजाज़देखकर अनन्या घबरा जाती है.वह अपनी जिठाने से डर डर की ही बातें करती.ऐसे ही एक दिन आरती market से सब्ज़ी लेकर आतीहै और घर में आते ही अन्या से कहती है.बाहर आंधी तूफान चल रही है मौसम बिगड़ा हुआ है.

तुम्हें इतना भी अंदाज़ा नहीं है कि छत परसूखे कपड़े रखे हैं, उन्हें उतारकर ले आऊं.क्या मौसम खराब हो चुका है?मैंने ध्यान नहीं दिया.मैं अभी कपड़े उतार कर ले आती हूं.इतनी ज़्यादा लापरवाही अच्छी बात नहीं है.अब तुम्हारी शादी हो चुकी है.रहने दो आ चुकी हूं मैं यह सब्ज़ी रसोई मेंरख दो मैं कपड़े खुद उतार कर ले आऊंगी.आरती सब्ज़ी का थैला अनन्या के हाथ में दे देती हैऔर खुद छत पर कपड़े उतारने के लिए चली जाती है.उसी वक्त कांता बाहर आती है और अनन्याको इतना घबराया हुआ देखकर पूछती है.

अरे अनन्या बहु तो सब्ज़ी लेकर हाल में क्यों खड़ी है?अरे इतने डर ही हुए क्यों आए कोई बहुत देख लिया क्या?नहीं मा जी वह बस इतना भूल करअनन्या सब्ज़ी रसोई में ले जाते है.तभी कांता की नज़र छत पर जाती हुई आरती पर पड़ती है.आरती को छत पर जाता हुआ देखकर वह समझ जातीहै कि ज़रूर आरती ने अनन्या को कुछ कहा है.अब कांता अनन्या से बात करने के लिए रसोईमें जाती है और कहती है क्या हुआ बहू?अपनी जेठानी के साथ मिजाज़ से डर गई क्या?बड़ी ऊपर से सकता है अंदर से बिल्कुल नरम जैसेनारियल होता है ना ऊपर से सख़्त अंदर से नराइसलिए तू उससे डरना वह बस ऐसे ही है.शायद आप बिल्कुल ठीक कह रही है मांझी.मैं बेकारी जेठानी जिसे डर रही थी.

वैसे शाम होने को यार मैं खानाबनाने की तैयारी कर देती हूं.कांता के समझाने पर अनन्या का डर अपनीजिठाने के लिए थोड़ा कम हो जाता है.पर कुछ भी काम करने से पहले अनन्या डरती कहीं उससे गलती नाहो जाए और उसकी जेठानी उस पर बरस ना पड़े इसलिए वह कोईकाम ही नहीं करती और जब सारे कपड़े उतार कर आती आती हैतो अनन्या पर जिताने के हाथ से सारे सूखे कपड़े ले लेती है.दीदी आप रहने दीजिए आप और कितनाकाम करेंगी मैं खाली बैठी हूँ.आज सारे कपड़े में स्त्री कर देती हूँ.

ठीक है, अगर तुम इतना ही बोल रहीहो तो आज तुम में स्त्री कर लो.पर ध्यान से इस तरह करना.इतना बोल कर आरती हाल में बैठकर TV देखनेलगती है और अनन्या कपड़े press करने लगती है.अपनी जेठानी को आराम से TV देखते हुए देखकरअनन्या मन ही मन खुद से कहती है.सही कह रही थी मां जी यह बसदिखती सत्य मिजाज़ की है, पर है नहीं.पर मां जी ने एक चीज़ गलत कहदी यह अंदर से नन तो नहीं है.बिल्कुल लल्लू है लल्लू.अनन्या भूल जाती है कि वह कपड़े press कर रही है.

और एक तक अपनी जेठानी को देखकर उसके बारे मेंमन ही मन बातें करने लगती है और इसी beachअनन्य से आरती की man की साड़ी जल जाती है.ये चलने के बाद वो कहाँ से आ रही है?कहीं ये मुझसे जल तो नहीं रही क्योंकि मैं कभीभी घर के काम करने से पीछे नहीं है tea.यह जलने की बदबू. अनन्या? तुम्हारा.अरे अनन्या तुम्हारा ध्यान किधर है?तुमने मेरी इतनी महंगी साड़ी जला दी.इतना बोल कर आरती जल्दी सी जाती है औरpress खड़ा करके अपनी साड़ी को हाथ में लेकरअनन्या को उसकी गलती के लिए डांटने लगती है.तुम छोटी बच्ची हो क्या?हमेशा कोई ना कोई गलती करती रहतीहो, आखिर तुम्हारा ध्यान किधर था?इस तरह से कपड़े press किए जाते हैं क्या?कुछ इस चुड़ैल की साड़ी ही क्यों जली?किसी और के कपड़े जल जाते?दीदी, माफ़ कर दो, गलती हो गई.अनन्या अपनी जेठानी की बातें सुनकर डर जाती है और घबराहटमें गर्म press पर हाथ रख देती है जिस वजह सेउसका हाथ भी जल जाता है ये देखकर आरती को अपनेकहे शब्दों पर अफसोस होता है और वो अपनी साड़ी कोछोड़कर अनन्या का हाथ पकड़ लेती है.

तुम सच में पागल हो.तुम्हारी शादी हो गई है.तुम अब इस घर की बहु हो फिरभी बच्चों की तरह हरकतें करती हो.मेरी साड़ी जला दी और अब अपनाहाथ कितना दर्द हो रहा होगा.चुपचाप मेरे साथ kitchen में चलो.आरती अनन्या को अपने साथ kitchen में ले जाती है और ठंडे पानीमें उसका हाथ देर तक रखती है ताकि उसकी जलन कम हो.अपनी जेठानी का यह प्यार देखकर अनन्याकी सारी गलतफहमी दूर हो जाती है.वहीं दूसरी ओर आरती जल्दी से जले हुए हाथ पर लगाने के लिएदवाई लाती है और अपने हाथों से अनन्या के ज़ख्मों पर दवाई लगातीतुम इस घर की बहु हो थोड़ी सावधानी से काम किया करो नादेखो कितना हाथ जल गया अब जब तक हाथ ठीक ना हो जाएघर के किसी भी काम को हाथ मत लगाना दीदी अब बहुत अच्छीहै आप ऊपर से जितनी सख़्त अंदर से होती है न मुझे माफकर दीजिए मैंने आपकी इतनी महंगी साड़ी जला दी.

मेरे सामने भोले बनने का नाटक मत करो.मुझे इस तरह के नौटंकी वाले लोग बिल्कुलपसंद नहीं जितना आप बोला है उतना करो.और अपना ख्याल रखो जाओ जाकर अपने कमरे में आराम करो.आरती अनन्या को आराम करने के लिए कहती हैऔर खुद घर के सारे काम करती है.ये देखकर अनन्या को बहुत दुख होता है क्योंकिउसने अपनी जिठाने के बारे में गलत सोचा.कुछ देर बाद कांता आती है और वो देखती है किआरती अकेले ही घर की सारी काम कर रही है.अरे आरती बहु, अनन्या बहु से आप कौन सी गलती हो गई?जो तूने उसे इस घर के काम से दूर कर दिया.आपकी प्यारी बहु हाथ जला कर बैठ गई है.

अब ऐसे में इसे घर के काम कैसे करने दूं?उसे दर्द नहीं होगा क्या?और देखो दो दिन हो गए पट्टी भी नहीं बदली.मैं बदलू तो ही बदलेगी.आरती पर, कभी कभी तो मुझे लगता है कि तू ही मेरी सास है.ऊपर से इतनी सख़्त वन जाती है कि हर किसी कोउसकी गलती के लिए डांट दिया है, सजा देती है.पर यही घर में किसी को ज़ुकाम भी होजाए तो तेरी सांस से अटक जाती है.देख रही है ना कैसी है तेरी जेठानी जी मैं जी देख रहीहूं इतना बोल कर अन्य और कांता आरती के ऊपर हंसते लगते हैं.यह देखकर पहली बार आरती भी अनन्या के सामने हँस पड़ती है.आज पहली बार अनन्या ने अपनी जिठानी की, हंसी देखीथी और यह देखकर उसे बहुत खुशी होती है.

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